स्टॉक (Growth और Prime)
ख़रीद और सप्लायर
हर सप्लायर बिल उसके इनवॉइस नंबर और GST के साथ डालें। स्टॉक बढ़ता है, लागत पता रहती है, और हर सप्लायर का बकाया दर्ज रहता है।
Growth और Prime में शामिल
- 1
सप्लायर चुनें या जोड़ें और उनका बिल नंबर और तारीख़ लिखें।
- 2
हर आइटम मात्रा के साथ जोड़ें — अपनी यूनिट में या ख़रीद की यूनिट (2 टिन) में — और रकम।
- 3
GST हर लाइन पर बनता है: आपके राज्य में CGST + SGST, बाहर से IGST। यह GST रिपोर्ट पर इनपुट टैक्स बनता है।
- 4
बताएँ कि पैसे दिए, थोड़े दिए, या उधार है, और किस अकाउंट से।
- 5
Save करें। स्टॉक असली लागत पर बढ़ता है, और उधार वाला बिल उस सप्लायर के बकाए में दिखता है।
उदाहरण
श्री ट्रेडर्स का बिल ST/219: 2 टिन तेल ₹4,200 + 5 kg पनीर ₹1,700 + 5% GST ₹295 = ₹6,195, HDFC से UPI द्वारा दिया। अब आपकी रेसिपी में तेल ₹140 प्रति लीटर का है।
काम की बातें
- सप्लायर को बाद में उनके पेज से पैसे दें — पेमेंट सबसे पुराने बिल में पहले जाता है।
- ग़लत बिल? खोलकर कैंसल करें; उससे जुड़ा स्टॉक वापस घट जाता है।